सुरेंद्र सिंह की मौत के साथ क्या दफन हो गई थानों की सख्ती? चर्चाओं का बाजार गर्म

*जिले की जनता पूछ रही सबाल।*
*SP साहब! कहां गई गुंडा परेड?*
*सुरेंद्र सिंह की मौत के साथ क्या दफन हो गई थानों की सख्ती? चर्चाओं का बाजार गर्म।।*
छतरपुर। जिले में अपराधियों के हौसले पस्त करने वाली और जनता में पुलिस का इकबाल बुलंद करने वाली 'गुंडा परेड' इन दिनों गायब नजर आ रही है। शहर की गलियों से लेकर सोशल मीडिया तक अब एक ही सवाल तैर रहा है—
*क्या सुरेंद्र सिंह की मौत के बाद पुलिस ने खौफ के आगे घुटने टेक दिए हैं?*
*सवालों के घेरे में खाकी का 'ठंडा' अंदाज*
कुछ समय पहले तक छतरपुर जिले के थानों में अपराधियों की कतारें दिखती थीं, लेकिन हालिया घटनाओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर ब्रेक लगा दिया है। जिले भर में इस बात को लेकर चर्चाओं का दौर गर्म है कि क्या सुरेंद्र सिंह की मौत के बाद उपजे विवाद और थानों में होने वाली मौतों के डर से पुलिस अब अपराधियों को बुलाने से कतरा रही है?
*जनता के बीच उठ रहे ये गंभीर सवाल:* दबिश या डर?क्या पुलिस अब कानूनी कार्रवाई के दौरान होने वाली अनहोनी और उसके बाद होने वाली जवाबदेही से घबरा गई है?
सुस्त पड़ी कार्रवाई- क्या अपराधियों के रिकॉर्ड खंगालने और उन्हें थाने लाकर हाजिरी लगवाने वाली प्रक्रिया ठंडे बस्ते में डाल दी गई है?
गुंडा परेड बंद होने से क्या असामाजिक तत्वों के मन से पुलिस का डर खत्म हो जाएगा?
*दफन हो गई सख्ती!*
चर्चा यह भी है कि पुलिस प्रशासन अब फजीहत से बचने के लिए "सेफ जोन" में खेल रहा है। सुरेंद्र सिंह के मामले में जिस तरह से पुलिस की घेराबंदी हुई थी, उसके बाद से थानों में सन्नाटा पसरा है। अपराधियों के बीच जो पुलिस का खौफ 'परेड' के माध्यम से बना रहता था, वह अब धीरे-धीरे खत्म होता दिख रहा है।
क्या एसपी साहब दोबारा उसी पुराने सख्त अंदाज में अपराधियों की परेड शुरू करवाएंगे, या फिर थानों में होने वाली मौतों की घबराहट सिस्टम पर हावी रहेगी?

Post a Comment

Previous Post Next Post