अमृत भारत योजना पर सवाल: कड़ाके की ठंड में हरपालपुर स्टेशन पर पॉलीथिन ओढ़कर रात गुजारने को मजबूर यात्री
हरपालपुर (छतरपुर)।
बुंदेलखंड अंचल में इन दिनों कड़ाके की ठंड अपना कहर बरपा रही है। छतरपुर जिले में दिन और रात के तापमान में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। जहां एक ओर लोग अपने घरों में गर्म कपड़ों और रजाइयों में दुबके हुए हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ मजबूर लोग ऐसे भी हैं जिन्हें खुले आसमान के नीचे ठंडी रातें काटनी पड़ रही हैं।
ताजा मामला छतरपुर जिले के हरपालपुर रेलवे स्टेशन का है, जहां केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत करोड़ों रुपये खर्च कर स्टेशन के विकास कार्य किए गए हैं। इस योजना का उद्देश्य यात्रियों को आधुनिक और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है।
भीषण ठंड के बावजूद स्टेशन परिसर में न तो रैन बसेरे की व्यवस्था है और न ही ऐसा बंद यात्री प्रतीक्षालय, जहां यात्री ठंड से बच सकें। मजबूरन बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे प्लेटफार्म, खुले परिसर और पुराने टिकट घर के बाहर ठंडे फर्श पर लेटे हुए नजर आए। कोई पॉलीथिन ओढ़कर तो कोई अखबार या पन्नी बिछाकर रात गुजारने को मजबूर है।
गुरुवार देर रात करीब 10 बजे जब हरपालपुर रेलवे स्टेशन का जायजा लिया गया, तो दूर-दराज से आए गरीब रेल यात्री कंपकंपाती ठंड में अपनी ट्रेन का इंतजार करते मिले। खुले आसमान के नीचे सो रहे ये यात्री रेलवे प्रशासन की लापरवाही और व्यवस्थाओं की पोल खोलते नजर आए।
ठंड से बचाव को लेकर जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे तमाम दावों की सच्चाई इन तस्वीरों ने उजागर कर दी है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद आम यात्रियों के लिए न बैठने की उचित व्यवस्था है और न ही ठहरने की।
अमृत भारत योजना के तहत सुविधाओं का वादा किया गया था, लेकिन हकीकत में आज भी यात्री बुनियादी सुविधाओं से कोसों दूर हैं।
यह स्थिति न सिर्फ रेलवे प्रशासन की उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि आम यात्रियों की मजबूरी और पीड़ा को भी उजागर करती है।
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